निराहारी बाबा
(NIRAHRI BABA)
व्यक्तिगत विवरण
- जन्म तिथि: 26 जनवरी, 1965 (विक्रम संवत 2021-10-13)
- जन्म स्थान: धरान उपमहानगरपालिका, वार्ड नं. 12, सुनसरी, नेपाल
- शैक्षिक योग्यता: स्नातक (वाणिज्य शास्त्र), नेपाल
- सेवा अनुभव: त्रिभुवन विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी लेखाकार पद पर 33 वर्षों तक सेवा देने के पश्चात स्वैच्छिक अवकाश
निराहारी बाबा के बारे में
मैं महालक्ष्मी नगरपालिका – 8, ललितपुर, नेपाल निवासी, वर्ष 60 के राजेन्द्र रेग्मी, मेरे शरीर में मानव से भिन्न अलौकिक (Divine Power) शक्ति का वास है। यह शक्ति मुझे महाकाल उज्जैन (भारत) के शिव भक्त होने के कारण प्राप्त हुई है। मैंने अपना यह शरीर भस्म आरती के लिए समर्पित किया था। ईश्वर की कृपा से मुझे मेरे शरीर में कुछ विशेष शक्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जो विश्व मानव से भिन्न हैं।
जन्म से कई वर्षों के बाद मुझे ऐसी सिद्धि प्राप्त हुई है, जिसे केवल मैं और इसे देने वाले ईश्वर ही जानते हैं। विज्ञान के इस युग में अध्यात्म को प्रमाणित और पुष्ट करने का कार्य वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के माध्यम से किया जा सकता है। जीवन को बेहतर बनाने के लिए अध्यात्म और विज्ञान दोनों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
भारत के DRDO ने ‘चुनहरी वाला बाबा’ जो निराहारी (बिना अन्न-जल के जीवित) थे, उनके ऊपर अनुसंधान किया था और उनकी निराहारी स्थिति को प्रमाणित किया था। मेरे शरीर में ‘चुनहरी वाला बाबा’ से भी अधिक अलौकिक शक्तियाँ हैं। नेपाल सरकार की मेडिकल बोर्ड बीर अस्पताल (समस्त डाक्यूमेंट्स वेबसाइट में संलग्न है ) ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि उनकी अनुसंधान क्षमता इस परख के लिए पर्याप्त नहीं है। इस कारण मैंने भारत सरकार के DRDO और AIIMS अस्पताल से अनुसंधान की अपील की है। AIIMS द्वारा मेरे शरीर पर अनुसंधान की प्रथम चरण की प्रक्रिया (टेस्ट) शुरू हो चुकी है। मेरे ऊपर अनुसंधान की प्रक्रिया आरंभ करने हेतु मैं AIIMS संस्थान का हृदय से आभारी हूँ।
निराहारी बाबा के शरीर की विशेषताएँ
टिप्पणी: मेरे शरीर की विशेषताएँ यह हैं कि ईश्वर की कृपा से प्राप्त सिद्धि के कारण सूर्य और हवा ही मेरे आहार हैं। यह विश्व मेडिकल साइंस के लिए अनुसंधान के बाद यह मानव शरीर के लिए लाभकारी है तो यह भविष्य में किये जाने वाले विभिन्न वैज्ञानिक परिक्षण के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
मैं दिनांक 20 जून 2025 तक पिछले 23 महीनों से बिना अन्न, जल और फल के जीवित हूँ। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से असंभव माना जाता है। विज्ञान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, बिना जल के मानव शरीर अधिकतम 18 दिन तक जीवित रह सकता है (जैसा कि ऑस्ट्रिया निवासी Andreas Mihavecz के मामले में देखा गया था)। किंतु मैं इस सीमा से कहीं अधिक समय तक बिना जल के जीवित हूँ।
मैंने प्रयोग स्वरूप अत्यधिक मात्रा में दैनिक-दैनिक आयुर्वेदिक एवं एलोपैथिक दवाएं — जैसे शुगर, ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, पेरासिटामोल, दर्द निवारक ब्रुफिन आदि को 100–200 टैबलेट्स तक बिना जल के ग्रहण किया, फिर भी मेरे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा और मैं पूर्णतः स्वस्थ रहा।
⚠️ महत्वपूर्ण चेतावनी: कृपया कोई भी दर्शक या पाठक इस प्रकार का प्रयोग न करें। सामान्य व्यक्ति के लिए यह अत्यंत घातक और जानलेवा हो सकता है।
बिना अन्न और जल ग्रहण किए हुए भी मेरे शरीर में पसीना, मूत्र (100-500 मि.ली. प्रतिदिन) आदि सामान्य रूप से बनते हैं, जो एक असामान्य और वैज्ञानिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण तथ्य है।
जब मैं लगभग 60°C गर्म जल को नंगे शरीर पर डालता हूँ, तो सिर (जलधारी) से पाँव तक मुझे किसी प्रकार की जलन या असहजता का अनुभव नहीं होता, जो एक सामान्य मानव अनुभव के विपरीत है।
बिना किसी आहार और जल के सेवन के बावजूद, मेरे शरीर में सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक बल और ऊर्जा विद्यमान रहती है।
जहाँ एक सामान्य व्यक्ति सूर्य को नंगी आँखों से कुछ सेकंड या मिनट ही देख सकता है, मैं सूर्य को कई घंटों तक सीधी नजर से देख सकता हूँ — बिना किसी परेशानी या आँखों को नुकसान के।
विभिन्न निराहारी साधनाओं से प्राप्त निष्कर्ष
1. काठमांडू (नेपाल) – 20 दिवसीय निराहारी साधना:
मैंने सुन्दरीमाई मंदिर, रूपसेटार, गोकर्णेश्वर, काठमांडू, नेपाल में सांसद, महापौर, मंदिर समिति और स्थानीय नेतृत्व की देखरेख में 20 दिनों तक CCTV कैमरे की निगरानी में निराहारी साधना की थी। इस दौरान मैंने किसी भी प्रकार का अन्न, जल या फल ग्रहण नहीं किया, साथ ही अत्यधिक मात्रा में दवाइयाँ लेने पर भी मेरे शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं हुआ। इस साधना की CCTV हार्डडिस्क माननीय सांसद श्री संतोष चालीसे जी के पास सुरक्षित है।
इस विषय की पुष्टि हेतु नेपाल मेडिकल बोर्ड, बीर अस्पताल को देश और विदेश में अनुसंधान के लिए पत्राचार किया गया था। बीर अस्पताल ने अपनी अनुसंधान असमर्थता और तकनीकी क्षमता की सीमा को स्वीकारते हुए लिखित रूप में मना किया, जिसका दस्तावेज वेबसाइट में संलग्न है।
2. पटना (भारत) – 21 दिवसीय निराहारी साधना (01 अगस्त 2024 – 21 अगस्त 2024):
मेरे द्वारा पटना, बिहार में जिलाधिकारी की अनुमति से अपराध विरोधी मोर्चा कार्यालय, कंकड़बाग में CCTV निगरानी में 21 दिनों तक बिना अन्न और जल के साधना की गई।
साधना के शुरुवाती तीसरे दिन से आखिर तक जिलाधिकारी महोदय जी के निर्देशानुसार जयप्रभा अस्पताल के सरकारी चिकित्सकों की टीम ने मेरा चिकित्सकीय परीक्षण किया।
इस कार्यक्रम में अध्यक्ष धनवंत सिंह राठौर (अपराध विरोधी मोर्चा), बुद्धि बाहादुर भट्ट, पत्रकार अजय झा और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
21 दिन की निराहारी साधना पूर्ण करने पर मुझे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की सीमा पार करने हेतु निम्नलिखित माननीयों द्वारा सम्मानित किया गया:
- बिहार सरकार के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री विजय सिन्हा
- माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री नंद किशोर यादव
- माननीय मंत्री श्री जीवेश मिश्रा
- माननीय मंत्री श्री अशोक चौधरी
- हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ (जिन्होंने हृद्य नारायण जयंती पर सम्मानित किया)
सभी प्रमाण, अखबारों की कतरनें और डिजिटल मीडिया कवरेज वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
3. भारत सरकार को अनुसंधान के लिए प्रस्तुतियाँ:
मैंने अपने शरीर की असाधारण क्षमता की वैज्ञानिक पुष्टि हेतु प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), रक्षा मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, DRDO और AIIMS दिल्ली को सभी दस्तावेजों के साथ शारीरिक अनुसंधान के लिए लिखित अपील प्रस्तुत की है।
AIIMS दिल्ली ने मेरी अपील स्वीकार कर शरीर अनुसंधान की प्रथम चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इससे संबंधित सभी दस्तावेज वेबसाइट में संलग्न हैं।


